रंगोली भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा और लोक-कला है ।
हर प्रदेश में इसका भिन्न नाम और शैली हो सकती है लेकिन मूल भावना और संस्कृति बहुत मिलती जुलती है ।
यह इसे विविधता देती है और इसके विभिन्न आयामों को भी प्रदर्शित करती है ।
इसे सामान्यतः त्योहार, व्रत, पूजा, उत्सव विवाह आदि शुभ अवसरों पर सूखे और प्राकृतिक रंगों से बनाया जाता है ।
इसमें साधारण ज्यामितिक आकार हो सकते हैं या फिर देवी देवताओं की आकृतियाँ। इनका प्रयोजन सजावट और सुमंगल है ।
इन्हें प्रायः घर की महिलाएँ बनाती हैं ।
विभिन्न अवसरों पर बनाई जाने वाली इन पारंपरिक कलाकृतियों के विषय अवसर के अनुकूल अलग-अलग होते हैं ।
इसके लिए प्रयोग में लाए जाने वाले पारंपरिक रंगों में पिसा हुआ सूखा या गीला चावल, सिंदूर, रोली, हल्दी, सूखा आटा और अन्य प्राकृतिक रंगो का इस्तेमाल किया जाता है पर रासायनिक रंगों का प्रयोग भी होने लगा है ।
